LIVE UPDATE
झमाझम खबरें

संगीतमय श्रीरामकथा में सीता श्रीराम की जीवंत झांकियां निकालकर विवाहोत्सव धूमधाम से मनाया गया

मरवाही/ वृन्दावन धाम से पधारे पंडित राहुलकृष्ण महाराज जी के मुखारबिंद से भगवान श्रीराम जी की दिव्य पावन कथा सुनने का सौभाग्य क्षेत्रवासियों को प्राप्त हो रहा है।यह कथा ग्राम कुम्हारी के पंडित कमला प्रसाद मीरा चौबे परिवार द्वारा संगीतमयी श्रीरामकथा महोत्सव का आयोजन कराया गया है।इस कथा को सुनने के लिए समस्त ग्रामवासी सहित आसपास गाँव के श्रद्धालुजन भी पहुँच रहे हैं।कथा के दौरान आकर्षक जीवंत झांकियां निकाली जा रही हैं तथा संगीत के माध्यम से मनमोहक भजनों की प्रस्तुति पर श्रोतागण आनंदित होकर झूम उठते हैं एवं जय सियाराम जय सियाराम के जयघोष से पूरा पंडाल गूंज उठता है।कथा के दौरान व्यास जी ने पाँचवें दिन की कथा में श्रीराम के प्रति लक्ष्मण के मन में आदर्श सेवा भावना व भ्रातृत्व प्रेम का वर्णन किया तथा राजा जनक जी के यहाँ गुरु विश्वामित्र के साथ श्रीराम लक्ष्मण का आगमन होना एवं फुलवारी बगिया में श्रीराम सीता के अकस्मात भेंट होने पर भावपूर्ण कथा सुनाई।सीता स्वयंबर की घोषणा पश्चात् धनुष भंग होने पर श्रीराम सीता का मंगलमय विवाहोत्सव सुंदर झांकियों के साथ कथा श्रवण कराया गया।
व्यास राहुलकृष्ण महाराज ने कहा कि हमारे जीवन में मर्यादा और संस्कार का होना अति आवश्यक है। मर्यादा,मानवता का वो सुंदर गहना है,जो मनुष्य के संस्कारों एवं चरित्र की प्रतीति देता है जीवन में संस्कार और मर्यादा की बड़ी महत्ता है।भगवान राम मर्यादा में रहकर हर एक कार्य को किये हैं इसलिए मर्यादित आचरण व्यवहार के कारण ही मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए।मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने सीता स्वयंबर में पहुंचकर रघुवंशी होने का परिचय दिया धनुष पर प्रत्यंचा जब किसी भी बलशाली राजा वीरयोद्धा ने नहीं चढ़ा पाये तब राजा जनक को चिंता हुई और उन्होंने कहा क्या यह धरती वीरों से विहीन है। राजा जनक के द्वारा यह कहे जाने पर शेषावतार लक्ष्मण ने रघुवंशी होने का परिचय दिया और वे बोले यदि मेरे प्रभु श्रीराम मुझे आदेश दें तो मैं इस धरती को गेंद की तरह उठा लूँ और इस धनुष को मैं तत्क्षण छिन्न भिन्न कर सकता हूँ।भगवान श्रीराम ने लखन लाल को शांत किया और गुरुआज्ञा प्राप्त कर धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर राजा जनक के संताप को दूर किया है।माता सीता मन ही मन राम को ही प्राप्त करने के लिए माता पार्वती से प्रार्थना करती हैं।”सुनु सिय सत्य आशीष हमारी पूजिहि मन कामना तुम्हारी” गिरिजा महारानी एवं गुरु विश्वामित्र के आशीर्वाद से सभी मनोरथ पूर्ण हुये और मंगलगान के साथ श्रीराम सीता का विवाहोत्सव पूर्ण हुआ।कथा पश्चात् मंगल आरती की गई और प्रसाद वितरण किया गया।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

Back to top button
error: Content is protected !!